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माँ देवलबाई – सिहढायच

माँ देवलबाई – सिहढायच

पूरा नाममाँ देवलबाई 
माता पिता का नामपिता भलोजी सिहढायच, विवाह बापल देथा के साथ सिंध के थरपारकर जिले के खारोड़ा गांव में
जन्म व जन्म स्थान 
स्वधामगमन
 
विविध
चारण समाज में देवल देवी के नाम से चार लोक देवीयां अवतरित हुई थी। उनमें से मूळ नाम देवलबाई, शाख सिहढायच वि.स. 1444 में, राजस्थान में जैसलमेर जिले के पोकरण तहसील के माड़वा गांव में जन्म। पिता भलोजी सिहढायच, विवाह बापल देथा के साथ सिंध के थरपारकर जिले के खारोड़ा गांव में, 141 वर्ष की आयुष में अंतध्र्यान हुये। वर्तमान में माताजी का मंदिर खारोड़ा गांव में है। इनके 6 पुत्रियां थी जिसमे 1.बूट मां, 2.बलाड़, 3.बेचराजी, 4.जेतबाई, 5.बाजरीबाई (बालवी, 6.मानश्रीबाई ओर तीन भाई मेंपाजी, खीमाजी ओर गोगाजी।

 जीवन परिचय

चारण समाज में देवल देवी के नाम से चार लोक देवीयां अवतरित हुई थी। उनमें से मूळ नाम देवल्बाई, शाख सिहढायच वि.स. 1444 में, राजस्थान में जैसलमेर जिले के पोकरण तहसील के माड़वा गांव में जन्म। पिता भलोजी सिहढायच, विवाह बापल देथा के साथ सिंध के थरपारकर जिले के खारोड़ा गांव में, 141 वर्ष की आयुष में अंतध्र्यान हुये। वर्तमान में माताजी का मंदिर खारोड़ा गांव में है। इनके 6 पुत्रियां थी जिसमे 1.बूट मां, 2.बलाड़, 3.बेचराजी, 4.जेतबाई, 5.बाजरीबाई (बालवी, 6.मानश्रीबाई ओर तीन भाई मेंपाजी, खीमाजी ओर गोगाजी|

चारण बरण चकार में, देवल प्रगटी दोय।
पैली तो मीसण थई, बीजी सिंढायच जोय।।1
सवळ घड़सी आंख में, होतो दुष्ट अदीठ।
सो बळिहारी देवला, आन कियोज मजीठ।।2
मांणक हंदो काळजो, रोज बींधतो आंण।
सो पच देवल गांळियो, सिंढायच सब जांण।।3

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