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Category: गजल

डोकरी – गज़ल

डोकरी – गज़ल नरपत आसिया “वैतालिक”बैठी घर रे बार डोकरी!किणनें रही निहार डोकरी!हेत हथाई अपणायत री,टाबर रे रसधार डोकरी!बाल़कियां री हरपल़ बेली,बण बाघण खुंखार डोकरी!धीणां, डांगर, प्हैला आंगण,राख नीरती न्यार…

बन्द करिए बापजी – गजल

हर बात को खुद पे खताना, बन्द करिए बापजी। बिन बात के बातें बनाना, बन्द करिए बापजी। बीज में विष जो भरा तो फल विषैले खाइए, ख़ामख़ा अब खार खाना,…

गज़ल – डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत

चींटियों के चमचमाते पर निकल आए सुनो। महफ़िलों में मेंढ़कों ने गीत फिर गाए सुनो। अहो रूपम् अहो ध्वनि का, दौर परतख देखिए, पंचस्वर को साधने कटु-काग सज आए सुनो।…

मत करो इस मुल्क से गद्दारियाँ पछताओगे – डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

मत करो इस मुल्क से गद्दारियाँ, पछताओगे देखकर फिर देश की दुश्वारियाँ, पछताओगे वतन से ही बेवफाई फिर वफ़ा है ही कहाँ खो के अपनी कौम की खुद्दारियाँ, पछताओगे इस…

मित्रता – गिरधरदान रतनू दासोड़ी

है खांडै री धार मित्रता। सबसूं उत्तम कार मित्रता!! रथ हांकै नै पग धो देवै। सँभल़ै डग -डग लार मित्रता!! डिगतै नैं कांधो दे ढाबै। निज भुज लेवै भार मित्रता!!…

दो गजलां -गिरधरदान रतनू दासोड़ी

१ एकर म्हारै गाम आवजै। साथै थारी भाम लावजै।। चांदो तारा बंतल़ करता। हंसतो रमतो धाम पावजै।। मिरच रोटियां मन मनवारां काल़जियै रो ठाम पावजै।। स्नेह सुरां री बंशी सुणजै।…

मांडणा ~ डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

उर रख कोड अपार, रीझ कर त्यार रँगोली प्रिया-विष्णु पधार, बहुरि मनुहार सुबोली। सिंधुसुता सुखधाम, नाम तव है घणनामी। तोड़ अभाव तमाम, अन्न-धन देय अमामी। कवि अमर-सुतन ‘गजराज’ कह, मांडै…

जाती रही – गजल ~डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

हाथ जब थामा उन्होंने, हड़बड़ी जाती रही। जिंदगी के जोड़ से फिर, गड़बड़ी जाती रही। ‘देख लूंगा मैं सभी को’ हम भी कहते थे कभी, आज अनुभव आ गया तो,…

गजल – आशूदान मेहडू

“दिल लगी”  “गज़ल” मैने सीखा है जिंदगी मे, हर दिल दिल से लगाना। यही जीवन है मेरा यारो, यही मेरा फसाना। मैं पीता नहीं शराब कभी, किसी ग़म को भगाने।…